राष्ट्रीय
भारत के विकास की नई गाथा — आत्मनिर्भरता, तकनीक और परिवर्तन की दिशा में बड़ा कदम
प्रधानमंत्री ने "डिजिटल भारत ग्राम योजना" का शुभारंभ किया — गाँवों तक पहुँचेगी हाई-स्पीड इंटरनेट सुविधा
नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रधानमंत्री ने “डिजिटल भारत ग्राम योजना” का शुभारंभ किया।
इस योजना का उद्देश्य देश के प्रत्येक गाँव को हाई-स्पीड इंटरनेट, ऑनलाइन शिक्षा, ई-स्वास्थ्य और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना है।
सरकार ने घोषणा की है कि अगले तीन वर्षों में देश के 6 लाख से अधिक गाँवों में फाइबर इंटरनेट नेटवर्क स्थापित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि “डिजिटल भारत” केवल एक तकनीकी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत के हर नागरिक को जोड़ने की पहल है।
इस योजना के तहत युवाओं को डिजिटल कौशल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे वे आईटी सेक्टर में रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।
सरकार का अनुमान है कि इस योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सालाना 10% की वृद्धि होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा मिलेगा।
स्मार्ट खेती से समृद्ध किसान — नई तकनीक से बढ़ी उम्मीदें
किसानों के लिए आधुनिक तकनीक — “स्मार्ट खेती अभियान” से आय में दोगुना इज़ाफा
कृषि मंत्रालय ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए “स्मार्ट खेती अभियान” शुरू किया है।
अब किसानों को ड्रोन द्वारा फसल की निगरानी, मिट्टी परीक्षण, मौसम की जानकारी और ऑनलाइन मार्केट एक्सेस की सुविधा मिलेगी।
सरकार का लक्ष्य है कि आधुनिक तकनीक के प्रयोग से उत्पादन बढ़े और लागत घटे।
इस अभियान के तहत किसानों को डिजिटल ऐप “ई-खेत” के ज़रिए अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं को बेचने की सुविधा दी जाएगी।
यह कदम बिचौलियों की भूमिका खत्म करेगा और किसानों की आमदनी बढ़ाएगा।
“राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में बड़ा सुधार — अब हर गाँव में मिलेगा टेलीमेडिसिन केंद्र”
सरकार ने शुरू किया ‘e-Health India Portal’ — ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर से ऑनलाइन परामर्श की सुविधा
भारत सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करने के लिए “e-Health India Portal” की शुरुआत की है।
इस डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से गाँवों के लोग अब अपने मोबाइल या कॉमन सर्विस सेंटर से डॉक्टरों से ऑनलाइन सलाह ले सकेंगे।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 2 लाख से अधिक टेलीमेडिसिन केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं।
इन केंद्रों में वीडियो कंसल्टेशन, ई-प्रिस्क्रिप्शन और डिजिटल रिपोर्टिंग की सुविधा उपलब्ध होगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा —
“हमारा लक्ष्य है कि भारत के किसी भी नागरिक को इलाज के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। तकनीक अब हर गाँव के दरवाजे पर इलाज पहुँचा रही है।”
इस योजना के तहत AI-आधारित स्वास्थ्य विश्लेषण प्रणाली भी शुरू की जा रही है जो सामान्य बीमारियों की पहचान पहले ही कर लेगी।
विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच ऑनलाइन कराई जाएगी।
डॉक्टरों और मरीजों के बीच की दूरी अब खत्म हो रही है।
ग्रामीण भारत अब स्वास्थ्य सुविधाओं की नई डिजिटल क्रांति का हिस्सा बन चुका है।
प्रधानमंत्री का राष्ट्र को संबोधन
2047 तक विकसित भारत” का रोडमैप पेश
प्रधानमंत्री ने आज राष्ट्र को संबोधित करते हुए भारत के समग्र विकास के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों — शिक्षा, रोजगार और डिजिटल इंडिया — पर केंद्रित नई राष्ट्रीय योजनाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक “विकसित राष्ट्र” बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवाओं की भूमिका सबसे अहम होगी।
संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि आने वाले वर्षों में सरकार शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और कौशल-आधारित बनाने पर ज़ोर देगी ताकि छात्रों को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सके। इसके तहत “राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षा मिशन” की शुरुआत की जाएगी, जिसके अंतर्गत हर छात्र को डिजिटल टूल्स, ई-लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म और स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा दी जाएगी।
रोज़गार के क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने “युवा रोजगार सृजन कार्यक्रम 2.0” का ऐलान किया, जिसके माध्यम से देशभर में 1 करोड़ से अधिक नई नौकरियाँ सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह नौकरियाँ विशेष रूप से स्टार्टअप, विनिर्माण, हरित ऊर्जा और स्वास्थ्य क्षेत्र में दी जाएँगी।
डिजिटल इंडिया मिशन के तहत प्रधानमंत्री ने बताया कि आने वाले तीन वर्षों में देश के प्रत्येक गाँव तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुँचाने का कार्य पूरा किया जाएगा। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि छोटे कारोबारियों, किसानों और विद्यार्थियों को भी नई संभावनाएँ मिलेंगी।
संबोधन के अंत में उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे इन योजनाओं में सक्रिय भागीदारी निभाएँ और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को साकार करने में अपनी भूमिका निभाएँ। प्रधानमंत्री ने कहा, “यह समय भारत के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का युग है; हमें शिक्षा, कौशल और तकनीक के माध्यम से इसे नई ऊँचाइयों तक पहुँचाना है।”
आर्थिक विकास दर 8% के पार
IMF ने भारत की अर्थव्यवस्था को बताया सबसे तेज़ बढ़ती अर्थव्यवस्था
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी ताज़ा “वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट 2025” में भारत की अर्थव्यवस्था को विश्व की सबसे तेज़ गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में स्थान दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 8.1% दर्ज की गई है, जो वैश्विक औसत से दोगुनी है।
IMF ने कहा कि भारत ने कोरोना महामारी और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बावजूद अपनी नीतिगत स्थिरता और घरेलू बाज़ार की क्षमता के बल पर अभूतपूर्व आर्थिक प्रगति की है। ऊर्जा, निर्माण, सेवा और डिजिटल सेक्टर में तेज़ी से विस्तार होने के कारण भारत अब वैश्विक निवेशकों का केंद्र बन चुका है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत ने डिजिटल पेमेंट, स्टार्टअप ईकोसिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में ऐतिहासिक सुधार किए हैं। “मेक इन इंडिया”, “डिजिटल इंडिया” और “स्टार्टअप इंडिया” जैसी योजनाओं ने न केवल रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया है बल्कि विदेशी निवेश को भी आकर्षित किया है।
IMF की मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा कि भारत के पास युवा कार्यबल, विशाल घरेलू मांग, और मजबूत नीतिगत ढांचा है जो आने वाले दशक में इसे दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी शुरू कर दी है, विशेष रूप से तकनीकी और फार्मास्युटिकल सेक्टर में।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि भारत ने मुद्रास्फीति नियंत्रण, राजकोषीय अनुशासन, और सार्वजनिक निवेश में संतुलन बनाए रखा है। ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और हरित ऊर्जा परियोजनाओं पर किए गए निवेश ने अर्थव्यवस्था को एक स्थिर आधार प्रदान किया है।
प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ने IMF की इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह भारत के परिश्रमी नागरिकों और दूरदर्शी नीतियों की सफलता का प्रमाण है। सरकार ने स्पष्ट किया कि अगले कुछ वर्षों में लक्ष्य “5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था” बनने का है, और इसके लिए विनिर्माण, निर्यात और स्टार्टअप सेक्टर पर विशेष बल दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ़्तार जारी रही तो भारत न केवल एशिया में बल्कि पूरी दुनिया में आर्थिक नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है। IMF की रिपोर्ट ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत अब केवल एक “उभरती अर्थव्यवस्था” नहीं, बल्कि “वैश्विक विकास का इंजन” बन चुका है।
महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई पहल — “सशक्त नारी मिशन” का शुभारंभ
महिलाओं के लिए “सशक्त भारत मिशन” — आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई पहचान
महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए सरकार ने “सशक्त भारत मिशन” की घोषणा की है।
यह मिशन देशभर की महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
इस योजना के तहत महिलाओं को 5 लाख रुपये तक ब्याज-मुक्त ऋण, कौशल विकास प्रशिक्षण, और ई-व्यवसाय (E-Business) प्लेटफॉर्म की सुविधा दी जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए “नारी उद्यम केंद्र” की स्थापना की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य है कि महिलाएँ न केवल आत्मनिर्भर बनें, बल्कि अपने समुदाय में अन्य महिलाओं को भी प्रेरित करें।
प्रधानमंत्री ने कहा — “जब देश की महिलाएँ आगे बढ़ेंगी, तभी भारत विश्वगुरु बनेगा।”
“संसद सत्र 2025: सरकार ने पेश किया ‘नया रोजगार एवं विकास विधेयक’”
युवा उद्यमिता और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए ऐतिहासिक कदम — लाखों युवाओं को मिलेगा रोज़गार
नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र 2025 में केंद्र सरकार ने “रोज़गार एवं विकास विधेयक” पेश किया है।
यह विधेयक देश में बेरोजगारी की दर कम करने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
विधेयक के तहत सरकार ने घोषणा की है कि अगले तीन वर्षों में एक करोड़ युवाओं को स्टार्टअप और लघु उद्योगों से जोड़ा जाएगा।
इसके लिए “राष्ट्रीय युवा उद्यमिता कोष” बनाया गया है, जिससे युवाओं को बिना ब्याज ऋण और तकनीकी प्रशिक्षण मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने सदन में कहा —
“भारत के युवा हमारे भविष्य की शक्ति हैं। यह विधेयक उन्हें केवल नौकरी नहीं, बल्कि अवसर देगा।”
केंद्र सरकार राज्यों के सहयोग से ‘एक जिला — एक उद्योग’ योजना का भी विस्तार करेगी, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें।
संसद में विपक्ष ने भी इस योजना का स्वागत किया और सुझाव दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कौशल प्रशिक्षण पर अधिक जोर दिया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधेयक भारत की अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकेगा और रोजगार सृजन का नया युग शुरू करेगा।
“भारत की अंतरिक्ष शक्ति को मिला नया मुकाम — ISRO ने लॉन्च किया ‘भारतनेट सैटेलाइट मिशन’”
देश के हर गाँव तक इंटरनेट पहुँचाने के लिए अंतरिक्ष से कनेक्टिविटी — डिजिटल इंडिया को नई उड़ान
ISRO ने शुक्रवार को श्रीहरिकोटा से ‘भारतनेट सैटेलाइट मिशन’ का सफल प्रक्षेपण किया।
यह सैटेलाइट ग्रामीण भारत में हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि पर कहा —
“अब भारत का हर गाँव डिजिटल शक्ति से जुड़ जाएगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यवसाय सभी को नई दिशा मिलेगी।”
यह सैटेलाइट Ka-band तकनीक पर आधारित है जो इंटरनेट की स्पीड को 100 Mbps तक पहुँचाने में सक्षम है।
इस मिशन से देश के दूरस्थ क्षेत्रों में भी ऑनलाइन शिक्षा, ई-गवर्नेंस और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा।
ISRO के वैज्ञानिकों ने बताया कि आने वाले दो वर्षों में पाँच और ऐसे सैटेलाइट लॉन्च किए जाएँगे।
इससे भारत दुनिया के सबसे बड़े सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क में शामिल होगा।
यह मिशन भारत को “डिजिटल आत्मनिर्भर राष्ट्र” बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई
CBI और ED की संयुक्त टीम ने कई राज्यों में छापे मारे
केंद्र सरकार ने देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने अभियान को और अधिक सख्ती से लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। हाल ही में शुरू किए गए इस भ्रष्टाचार-विरोधी मिशन 2025 के तहत विभिन्न मंत्रालयों, सार्वजनिक उपक्रमों और राज्य स्तरीय संस्थानों में व्यापक स्तर पर जांच की जा रही है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सरकारी तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी को मज़बूत करना है।
सूत्रों के अनुसार, CBI, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग की संयुक्त टीमों ने पिछले कुछ हफ्तों में कई राज्यों में छापेमारी की है, जिनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड प्रमुख हैं। इन छापों के दौरान करोड़ों रुपये की नकदी, सोना, और संपत्ति के दस्तावेज़ जब्त किए गए हैं। कई वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारिक गठबंधनों पर भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध लाभ लेने के आरोप लगाए गए हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा नहीं, बल्कि “शून्य सहिष्णुता नीति” (Zero Tolerance Policy) का हिस्सा है, जिसके तहत किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इस अभियान की निगरानी के लिए एक विशेष “इंटीग्रेटेड मॉनिटरिंग सेल” गठित किया है, जो सभी एजेंसियों से रिपोर्ट प्राप्त करेगा और आगे की कार्रवाई तय करेगा।
साथ ही, सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे “जन शिकायत पोर्टल” और “भ्रष्टाचार हेल्पलाइन 14440” के माध्यम से गुमनाम रूप से भ्रष्टाचार की जानकारी साझा कर सकते हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, पिछले तीन महीनों में इन माध्यमों से लगभग 45,000 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से कई पर जांच जारी है।
आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि यह अभियान लगातार जारी रहता है तो इससे न केवल सरकारी विभागों में पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि निवेशकों का भरोसा भी मज़बूत होगा। विपक्षी दलों ने हालांकि इस अभियान में चयनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाया है और मांग की है कि जांच निष्पक्ष और सबूतों के आधार पर हो।
सरकार का दावा है कि यह अभियान आने वाले वर्षों में “भ्रष्टाचार मुक्त भारत” की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। सरकार का कहना है कि पारदर्शी प्रशासन और जवाबदेह शासन व्यवस्था ही “नए भारत” की नींव है।
रेलवे में बड़ा निवेश
500 नई ट्रेनों की घोषणा, यात्रियों को मिलेगा अत्याधुनिक अनुभव
भारतीय रेल ने देश के परिवहन नेटवर्क को आधुनिक और हाई-स्पीड बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रेल मंत्रालय ने घोषणा की है कि वर्ष 2026 तक 500 नई ट्रेनों का संचालन शुरू किया जाएगा, जिनमें से 150 ट्रेनें अत्याधुनिक “वंदे भारत” मॉडल पर आधारित होंगी। यह निर्णय देश की यात्रियों की बढ़ती संख्या, कनेक्टिविटी सुधार और समय की बचत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
रेल मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह योजना न केवल यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाएगी, बल्कि देश के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में ऐतिहासिक बदलाव लेकर आएगी। वंदे भारत ट्रेनों की नई खेप अत्याधुनिक तकनीक, बेहतर सेफ्टी फीचर्स और आरामदायक सीटिंग व्यवस्था से लैस होगी। इसके अलावा, सभी ट्रेनें पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा-कुशल होंगी, जिनमें कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम रखने की तकनीक अपनाई जाएगी।
रेलवे के अनुसार, नई ट्रेनों में 100% ‘मेक इन इंडिया’ तकनीक का उपयोग किया जाएगा। भारत के विभिन्न कोच फैक्ट्रियों जैसे चेन्नई, कपूरथला, और रायबरेली में इन ट्रेनों का निर्माण किया जाएगा। इससे देश में रोज़गार के हज़ारों नए अवसर पैदा होंगे और स्वदेशी निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।
वंदे भारत मॉडल की ट्रेनों को देश के सभी प्रमुख मार्गों जैसे दिल्ली–मुंबई, दिल्ली–कोलकाता, चेन्नई–बेंगलुरु, और अहमदाबाद–वाराणसी मार्गों पर प्राथमिकता दी जाएगी। ये ट्रेनें 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक चलने में सक्षम होंगी और इनके संचालन से यात्रा समय में लगभग 25% की कमी आएगी।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि आने वाले वर्षों में रेल नेटवर्क का 100% विद्युतीकरण पूरा कर लिया जाएगा, जिससे ईंधन की लागत में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, नए स्टेशनों पर वाई-फाई, डिजिटल टिकटिंग, और स्मार्ट डिस्प्ले सिस्टम जैसी सुविधाएँ भी दी जाएँगी ताकि यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव प्राप्त हो सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह परियोजना निर्धारित समय सीमा में पूरी होती है तो यह भारत को न केवल एशिया बल्कि पूरे विश्व के रेलवे मानचित्र पर अग्रणी देशों की श्रेणी में ला खड़ा करेगी। यह योजना भारत के परिवहन ढांचे में एक “रेल क्रांति” के रूप में देखी जा रही है, जो आर्थिक विकास और क्षेत्रीय जुड़ाव दोनों को मज़बूती देगी।
प्रधानमंत्री ने इस परियोजना को “विकसित भारत की गति और गौरव का प्रतीक” बताया और कहा कि भारतीय रेल अब केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण की रीढ़ बन चुकी है।